
बेल
Bael
Aegle marmelos · Rutaceae (जम्बीर कुल)
संस्कृत नाम: बिल्व, शाण्डिल्य, श्रीफल
संक्षेप में: स्वाद में कसैला, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
बेल भगवान शिव का सबसे प्रिय पेड़ है — तीन पत्तों वाला बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। इसका सख़्त खोल वाला फल अंदर से पीला, खुशबूदार और गूदेदार होता है। आयुर्वेद में कच्चा बेल दस्त-पेचिश की सबसे प्रसिद्ध दवा है और इसकी जड़ दशमूल में शामिल है।
पारंपरिक उपयोग
- गर्मी में पके बेल का शरबत लू से बचाव, पेट की ठंडक और कब्ज़ में पिया जाता है।
- कच्चे बेल का गूदा या बेलगिरी चूर्ण दस्त, पेचिश और आँतों की कमज़ोरी में पारंपरिक रूप से दिया जाता है।
- बेलपत्र का रस लोक-परंपरा में शुगर संतुलन के लिए लिया जाता है।
- बेलपत्र सावन और शिवरात्रि में शिव पूजा का अनिवार्य अंग है।
आयुर्वेदिक गुण
- गुण
- रस: कषाय (कसैला), तिक्त (कड़वा) · गुण: लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला) · तासीर: गर्म (कच्चा फल); पका फल मधुर (मीठा), गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
- दोषों पर असर
- कफ और वात को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में — सूखी और खारी भी। बरसात में कलमी पौधा लगाएँ; 4–5 साल में फल। बहुत कम देखभाल चाहिए।
ध्यान दें
कच्चा बेल और बेलगिरी कब्ज़ कर सकते हैं, इसलिए कब्ज़ में पका बेल ही लें। शुगर की दवा के साथ बेलपत्र का रस नियमित लेना हो तो पहले डॉक्टर से पूछें।
शब्दावली
- दशमूल
- दस पेड़-पौधों की जड़ों का मशहूर आयुर्वेदिक मिश्रण — सूजन, दर्द और बुखार में
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





