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अतीस – Atees

अतीस

Atees

Aconitum heterophyllum · Ranunculaceae

संस्कृत नाम: अतिविषा, शुक्लकन्दा, विषा

जड़ी-बूटी
उपयोगी भागकंद (जड़)
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।

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परिचय

अतीस हिमालय की ऊँचाइयों (2,500–4,000 मीटर) पर उगने वाला पौधा है, जिस पर नीले-बैंगनी टोपी जैसे फूल आते हैं। अपने परिवार (वत्सनाभ) के उलट यह सौम्य माना जाता है, इसलिए बच्चों की दवाओं में इसका ख़ास स्थान है — 'बालचतुर्भद्र' जैसे योग इसी से बनते हैं। अधिक दोहन के कारण यह संकटग्रस्त पौधा है।

पारंपरिक उपयोग

  1. बच्चों के दस्त, बुखार और खाँसी के आयुर्वेदिक योगों का प्रमुख घटक है।
  2. पाचन और भूख बढ़ाने के लिए आयुर्वेद में प्रयोग होता है।
  3. बुखार में कड़वी औषधि के रूप में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
तीनों दोषों को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

केवल ऊँचे हिमालयी इलाकों का पौधा है; बिहार के मैदान में नहीं उगता। जंगली पौधा संरक्षित है।

ध्यान दें

बाज़ार में असली अतीस की जगह तेज़ असर वाले वत्सनाभ की मिलावट हो सकती है — दवा भरोसेमंद फार्मेसी से ही लें।

शब्दावली

वात · पित्त · कफ
शरीर की तीन मूल शक्तियाँ — वात, पित्त और कफ; इनका संतुलन बिगड़ने पर रोग होते हैं। वात = गैस, दर्द, रूखापन; पित्त = जलन, एसिडिटी, गर्मी; कफ = बलगम, सर्दी-खाँसी, भारीपन।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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