
अंगूर
Grape
Vitis vinifera · Vitaceae (द्राक्षा कुल)
संस्कृत नाम: द्राक्षा, मृद्वीका
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
अंगूर एक लंबी, फैलने वाली बेल है जिसे मंडप या तार पर चढ़ाया जाता है। आयुर्वेद में द्राक्षा (विशेषकर मुनक्का) को फलों में सबसे उत्तम बताया गया है, क्योंकि यह मीठा, ठंडा और शरीर को पोषण देने वाला है। द्राक्षासव और द्राक्षादि योग इसी से बनते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- मुनक्का रात को भिगोकर सुबह खाने से कब्ज़ में हल्का आराम मिलता है।
- बुखार के बाद प्यास, जलन और कमज़ोरी में अंगूर का रस दिया जाता है।
- सूखी खाँसी और गले की ख़राश में मुनक्का चबाने की परंपरा है।
- पत्तों को लपेटकर कई देशों में व्यंजन बनाए जाते हैं।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला), मृदु (मुलायम, हल्के असर वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, अच्छी निकासी वाली मिट्टी और तार/मंडप का सहारा चाहिए। जनवरी–फरवरी में लगाएँ और हर साल छँटाई करें। बिहार में बारिश से पहले (मई–जून) फल पकने वाली किस्में ठीक रहती हैं।
ध्यान दें
शुगर के मरीज़ मात्रा का ध्यान रखें।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





