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सेब – Apple

सेब

Apple

Malus domestica · Rosaceae (गुलाब कुल)

संस्कृत नाम: सेव, सिञ्चितिका (आधुनिक नाम)

फलदारनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयदिसंबर, जनवरी, फ़रवरी
₹185छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

सेब ठंडे पहाड़ों का फल है, पर अब HRMN-99 जैसी कम ठंड चाहने वाली किस्में बिहार के मैदान में भी फल दे रही हैं (जून में पकती हैं)। कहावत है 'रोज़ एक सेब, डॉक्टर को दूर रखे'। सेब रेशे (पेक्टिन), पानी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है।

पारंपरिक उपयोग

  1. छिलके सहित सेब खाने से रेशे के कारण पाचन और कब्ज़ में मदद मिलती है।
  2. उबला या कद्दूकस किया सेब बच्चों और बुज़ुर्गों के दस्त में पारंपरिक आहार है।
  3. बीमारी के बाद कमज़ोरी और भूख न लगने में हल्का, पौष्टिक फल।
  4. सेब का सिरका रसोई और घरेलू नुस्खों में उपयोग होता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, अच्छी निकासी वाली दोमट मिट्टी। दिसंबर–फरवरी में लगाएँ। HRMN-99 बिहार में 2–3 साल में फल देता है; अच्छे फल के लिए दो पौधे पास-पास लगाएँ और सर्दी में छँटाई करें।

ध्यान दें

सेब के बीज चबाकर न खाएँ — इनमें थोड़ी मात्रा में हानिकारक तत्व होता है।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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