
हरड़ (हरीतकी)
Harad (Haritaki)
Terminalia chebula · Combretaceae (हरीतकी कुल)
संस्कृत नाम: हरीतकी, अभया, पथ्या, विजया
संक्षेप में: स्वाद में नमकीन, कसैला, तासीर गर्म। वात, पित्त और कफ — तीनों को संतुलित रखने वाली।
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परिचय
हरड़ (हरीतकी) मध्यम आकार का जंगली पेड़ है, जिसके अंडाकार, धारीदार फल त्रिफला के तीन फलों में से एक हैं। आयुर्वेद में इसे 'माँ के समान' हितकारी कहा गया है — 'हरीतकी भुंक्ष्व राजेन्द्र'। तिब्बती चिकित्सा में भगवान बुद्ध (मेडिसिन बुद्धा) के हाथ में हरड़ का फल दिखाया जाता है।
पारंपरिक उपयोग
- हरड़ का चूर्ण रात को गुनगुने पानी से कब्ज़ और पेट साफ़ करने के लिए पारंपरिक रूप से लिया जाता है।
- त्रिफला (हरड़, बहेड़ा, आँवला) पाचन, आँखों और रसायन के रूप में।
- भुनी छोटी हरड़ चूसने से गैस और अपच में आराम की परंपरा।
- हरड़ के काढ़े से गरारे मुँह के छालों और मसूड़ों में।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- लवण (नमकीन) छोड़कर पाँचों, मुख्य रूप से कषाय (कसैला)
- गुण (प्रकृति)
- लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- गर्म
- विपाक (पचने के बाद)
- मधुर (मीठा)
- दोषों पर असर
- तीनों दोषों को संतुलित करती है, विशेषकर वात।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, गहरी मिट्टी। बरसात में लगाएँ। बड़ा जंगली पेड़ — खेत की मेड़ या बड़े परिसर के लिए; 8–10 साल में फल।
ध्यान दें
गर्भावस्था, बहुत कमज़ोरी, दस्त और डिहाइड्रेशन में न लें।
शब्दावली
- त्रिफला
- आँवला, हरड़ और बहेड़ा — तीन फलों का मिश्रण
- रसायन
- शरीर को ताक़त देने, रोगों से बचाने और बुढ़ापा धीमा करने वाली औषधि
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





