
अगस्त (अगस्तिया)
Agast (Hummingbird Tree)
Sesbania grandiflora · Fabaceae (शिम्बी कुल)
संस्कृत नाम: अगस्त्य, मुनिद्रुम, वङ्गसेन
संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, मीठा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
अगस्त तेज़ी से बढ़ने वाला पतला, छोटा पेड़ है, जिस पर सफ़ेद या गुलाबी, चोंच जैसे बड़े फूल लटकते हैं। इसका नाम महर्षि अगस्त्य से जुड़ा है। दक्षिण और पूर्वी भारत में इसके फूलों के पकौड़े और पत्तों की सब्ज़ी बड़े चाव से खाई जाती है।
पारंपरिक उपयोग
- फूल और पत्तों की सब्ज़ी विटामिन A और आयरन से भरपूर मानी जाती है; लोक-परंपरा में रतौंधी में खाई जाती है।
- पत्तों का रस नाक में डालने की परंपरा सर्दी और सिर भारी होने में बताई गई है (वैद्य की सलाह से)।
- छाल का काढ़ा बुखार और पेट की गड़बड़ी में लोक-चिकित्सा में दिया जाता है।
- पान की बेल और काली मिर्च को सहारा देने और हरी खाद के लिए लगाया जाता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- तिक्त (कड़वा), मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- पित्त और कफ को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, नम मिट्टी। बरसात में बीज या पौधा लगाएँ; 6–8 महीने में फूल आने लगते हैं। पेड़ की उम्र कम (8–10 साल) होती है।
शब्दावली
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





