
कदम्ब
Kadamb
Neolamarckia cadamba · Rubiaceae
संस्कृत नाम: कदम्ब, नीप, हलिप्रिय
संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, कसैला, मीठा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
कदम्ब तेज़ी से बढ़ने वाला ऊँचा पेड़ है, जिस पर बरसात में गेंद जैसे गोल, नारंगी-पीले, खुशबूदार फूल लगते हैं। भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा होने के कारण यह मंदिरों और तालाबों के किनारे शुभ माना जाता है। इसकी छाल और पत्ते आयुर्वेद में बुखार और घाव में उपयोग होते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- छाल का काढ़ा बुखार और कमज़ोरी में लोक-परंपरा में दिया जाता है।
- पत्तों का लेप घाव, सूजन और फोड़ों पर लगाया जाता है।
- फलों का रस और फूल पित्त की जलन में ठंडक के लिए उपयोग होते हैं।
- छायादार पेड़ और पक्षियों के आश्रय के लिए बहुत अच्छा है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- तिक्त (कड़वा), कषाय (कसैला), मधुर (मीठा)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- कफ और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, नम मिट्टी; बहुत तेज़ बढ़ता है। बरसात में लगाएँ। 4–5 साल में फूलने लगता है।
शब्दावली
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





