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कटहल – Jackfruit

कटहल

Jackfruit

Artocarpus heterophyllus · Moraceae (वट कुल)

संस्कृत नाम: पनस

फलदारनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल (कच्चा व पका), बीज, पत्ते, लकड़ी
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, कसैला, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹185छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

कटहल दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ पर लगने वाला फल है और बिहार के लगभग हर गाँव में मिलता है। कच्चा कटहल 'शाकाहारी मीट' की तरह सब्ज़ी में और पका कटहल मीठे फल के रूप में खाया जाता है। आयुर्वेद में इसे पौष्टिक पर भारी (देर से पचने वाला) बताया गया है।

पारंपरिक उपयोग

  1. कच्चे कटहल की सब्ज़ी और अचार रेशे और ऊर्जा का अच्छा स्रोत हैं।
  2. भुने हुए बीज प्रोटीन वाले नाश्ते के रूप में खाए जाते हैं।
  3. पत्तों का काढ़ा लोक-चिकित्सा में मुँह के छालों और त्वचा पर फोड़ों में प्रयोग होता है।
  4. पीली, मज़बूत लकड़ी फर्नीचर और वाद्य-यंत्रों में काम आती है।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
मधुर (मीठा), कषाय (कसैला)
गुण (प्रकृति)
गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
ठंडी
दोषों पर असर
वात और पित्त को शांत करता है, कफ बढ़ाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, गहरी मिट्टी, जलभराव से बचाएँ। बरसात में लगाएँ। कलमी पौधा 3–4 साल में फल देता है।

ध्यान दें

पका कटहल भारी है; खाने के तुरंत बाद पान या पानी ज़्यादा न लें, अपच हो सकता है।

शब्दावली

वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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