
करंज
Karanj
Pongamia pinnata · Fabaceae (शिम्बी कुल)
संस्कृत नाम: करञ्ज, नक्तमाल
संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, कसैला, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
करंज चमकदार हरे पत्तों वाला मध्यम आकार का छायादार पेड़ है, जिस पर बसंत में हल्के गुलाबी-बैंगनी फूल आते हैं। इसके बीजों से निकलने वाला कड़वा तेल (करंज तेल) त्वचा रोगों और कीट-नाशक के रूप में प्रसिद्ध है। आयुर्वेद में इसे नीम की तरह 'कुष्ठघ्न' (त्वचा रोग नाशक) माना गया है।
पारंपरिक उपयोग
- करंज का तेल दाद, खाज, खुजली और फोड़ों पर बाहरी रूप से लगाया जाता है।
- पत्तों का काढ़ा घाव धोने और सेंक में प्रयोग होता है।
- टहनी से दातून करने की परंपरा है; यह मसूड़ों के लिए अच्छा माना जाता है।
- करंज तेल और खली खेतों में जैविक कीटनाशक और खाद के रूप में काम आते हैं।
- सड़क और खेत की मेड़ पर छाया व मिट्टी में नाइट्रोजन के लिए लगाया जाता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा), कषाय (कसैला)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- कफ और वात को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में — खारी और जलभराव वाली ज़मीन में भी। बरसात में लगाएँ; तेज़ी से बढ़ता है।
ध्यान दें
बीज और तेल खाने योग्य नहीं हैं — केवल बाहरी प्रयोग के लिए।
शब्दावली
- कुष्ठघ्न
- त्वचा के रोग दूर करने वाली
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





