
नारंगी (संतरा)
Orange
Citrus reticulata · Rutaceae (जम्बीर कुल)
संस्कृत नाम: नागरङ्ग
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, खट्टा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
नारंगी (संतरा, मैंडरिन) आसानी से छिलने वाला, मीठा-खट्टा, रसीला फल है। विटामिन C से भरपूर होने के कारण सर्दियों में यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्रोत है। इसके सूखे छिलके भी दवा और सौंदर्य में काम आते हैं।
पारंपरिक उपयोग
- संतरे का रस बुखार, कमज़ोरी और भूख न लगने में दिया जाता है।
- विटामिन C से भरपूर होने से सर्दी-ज़ुकाम में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- सूखे छिलके का चूर्ण बेसन/दही में मिलाकर चेहरे पर उबटन की तरह लगाया जाता है।
- छिलके की खुशबू जी मिचलाने में राहत देती है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
- तासीर
- गर्म (कुछ ग्रंथों में ठंडी)
- दोषों पर असर
- वात को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, अच्छी निकासी वाली मिट्टी; जलभराव से बचाएँ। बरसात या फरवरी–मार्च में कलमी पौधा लगाएँ; 3–4 साल में फल।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





