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बड़ी इलायची – Badi Elaichi (Black Cardamom)

बड़ी इलायची

Badi Elaichi (Black Cardamom)

Amomum subulatum · Zingiberaceae (आर्द्रक कुल)

संस्कृत नाम: स्थूलैला, बृहदेला, भद्रैला

मसाले व बीज
उपयोगी भागफल (दाने)
तासीरगर्म

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

बड़ी (काली) इलायची सिक्किम, दार्जिलिंग और पूर्वी हिमालय की नम छायादार ढलानों पर उगने वाला पौधा है, जिसके भूरे, झुर्रीदार फल ज़मीन के पास गुच्छों में लगते हैं। धुएँ में सुखाने से इसमें ख़ास धुएँदार खुशबू आती है। यह गरम मसाले और बिरयानी का ज़रूरी हिस्सा है।

पारंपरिक उपयोग

  1. गरम मसाले में डालने से भारी भोजन पचने में आसानी होती है।
  2. सर्दी, खाँसी और गले की ख़राश में बड़ी इलायची का काढ़ा।
  3. जी मिचलाने और मुँह की दुर्गंध में।
  4. सिरदर्द में बड़ी इलायची का तेल माथे पर लगाने की परंपरा।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

ठंडी, नम, छायादार पहाड़ी जलवायु चाहिए। बिहार के मैदान में फल नहीं आते; छाँव में बड़े गमले में पत्तों के लिए रख सकते हैं।

ध्यान दें

पथरी (गॉल स्टोन) वाले ज़्यादा न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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