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लौंग (लवंग) – Laung (Clove)

लौंग (लवंग)

Laung (Clove)

Syzygium aromaticum · Myrtaceae (जम्बू कुल)

संस्कृत नाम: लवङ्ग, देवकुसुम, श्रीसंज्ञ

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागसूखी फूल-कलियाँ (लौंग), तेल
तासीरठंडी
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजून, जुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, कड़वा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹150छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

लौंग असल में एक सदाबहार पेड़ की बिना खिली, सुखाई गई फूल-कलियाँ हैं। ताज़ी कलियाँ गुलाबी-लाल होती हैं और सूखकर भूरी हो जाती हैं। लौंग का तेल (यूजेनॉल) दाँत दर्द की सबसे प्रसिद्ध घरेलू दवा है और पूजा में भी लौंग चढ़ाई जाती है।

पारंपरिक उपयोग

  1. दाँत दर्द में लौंग दबाना या लौंग का तेल रुई से लगाना सबसे प्रचलित घरेलू उपाय है।
  2. खाँसी और गले की ख़राश में भुनी लौंग चूसने की परंपरा।
  3. मुँह की दुर्गंध और जी मिचलाने में लौंग चबाना।
  4. चाय, गरम मसाले और पूजा में।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा), तिक्त (कड़वा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
तासीर
ठंडी (आयुर्वेद के अनुसार)
दोषों पर असर
कफ और पित्त को शांत करती है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

गर्म, नम, उष्णकटिबंधीय जलवायु (केरल) का पेड़; बिहार में आधी छाँव और नम मिट्टी में पौधा बढ़ सकता है, पर फूल-कलियाँ मुश्किल से आती हैं। पाले से बचाएँ।

ध्यान दें

लौंग का तेल सीधे निगलें नहीं और छोटे बच्चों के मुँह में न लगाएँ।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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