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जायफल – Nutmeg

जायफल

Nutmeg

Myristica fragrans · Myristicaceae

संस्कृत नाम: जातीफल, जातीकोश (जावित्री)

मसाले व बीजविशेष सावधानीनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज (जायफल), बीज का लाल आवरण (जावित्री)
तासीरगर्म
धूपहल्की धूप या आधी छाँव
पानीज़्यादा — मिट्टी नम रखें
लगाने का समयजून, जुलाई, अगस्त

संक्षेप में: स्वाद में कड़वा, तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है — यह विशेष सावधानी वाला पौधा है; इसका सेवन केवल वैद्य की देखरेख में करें।

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परिचय

जायफल एक सदाबहार उष्णकटिबंधीय पेड़ है; इसके फल के अंदर बीज 'जायफल' होता है और बीज के ऊपर लाल जाली जैसी परत 'जावित्री' कहलाती है। दोनों मसाले और दवा में काम आते हैं। आयुर्वेद में जायफल नींद, दस्त और दर्द में बहुत थोड़ी मात्रा में दिया जाता है।

पारंपरिक उपयोग

  1. चुटकी भर जायफल दूध में डालकर रात को लेने से अच्छी नींद आने की परंपरा है।
  2. दस्त और पेट दर्द में जायफल को घिसकर चुटकी भर लेने का घरेलू नुस्खा है; छोटे बच्चों को डॉक्टर से पूछे बिना न दें।
  3. जायफल का तेल दाँत दर्द और जोड़ों के दर्द में बाहरी रूप से लगाया जाता है।
  4. गरम मसाला, मिठाई और पकवानों में खुशबू के लिए।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
तिक्त (कड़वा), कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), तीक्ष्ण (तेज़ असर वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

गर्म, नम, छायादार जलवायु का पेड़ है (केरल, कर्नाटक)। बिहार में आधी छाँव, नम मिट्टी में लगाएँ और पाले से बचाएँ। फल के लिए नर और मादा दोनों पेड़ चाहिए और 6–8 साल लगते हैं।

ध्यान दें

चुटकी से ज़्यादा जायफल नशा, चक्कर, घबराहट और दिल की धड़कन तेज़ कर सकता है। गर्भावस्था में न लें।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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