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जीरा – Jeera (Cumin)

जीरा

Jeera (Cumin)

Cuminum cyminum · Apiaceae (अजमोद कुल)

संस्कृत नाम: जीरक, अजाजी, दीर्घक

मसाले व बीजनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागबीज (फल)
तासीरगर्म
धूपपूरी धूप
पानीकम — मिट्टी सूखने पर
लगाने का समयनवंबर

संक्षेप में: स्वाद में तीखा-चरपरा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

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परिचय

जीरा 30–50 सेमी का पतला, बारीक पत्तों वाला सालाना पौधा है, जिसकी छोटी सफ़ेद-गुलाबी छतरियों में सुगंधित बीज बनते हैं। तड़के में जीरे की खुशबू भारतीय खाने की पहचान है। आयुर्वेद में यह पाचन, गैस और दस्त की सबसे सुलभ औषधि है।

पारंपरिक उपयोग

  1. जीरा पानी (भुना जीरा उबालकर) गैस, अपच और पेट फूलने में पारंपरिक रूप से पिया जाता है।
  2. भुना जीरा, काला नमक और छाछ दस्त और गर्मी में।
  3. प्रसूता को जीरे के लड्डू और जीरा पानी देने की परंपरा।
  4. रायता, जलजीरा और तड़के में भूख बढ़ाने के लिए।

आयुर्वेदिक गुण

रस (स्वाद)
कटु (तीखा-चरपरा)
गुण (प्रकृति)
लघु (हल्का, जल्दी पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
तासीर
गर्म
दोषों पर असर
कफ और वात को शांत करता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

ठंडी, सूखी सर्दी चाहिए; नवंबर में बीज बोएँ। धूप, हल्की रेतीली मिट्टी, कम पानी। बिहार में प्रयोग के तौर पर गमले में उगा सकते हैं।

शब्दावली

कफ
शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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