PARIJATNURSERY & GARDEN
अमरूद – Guava

अमरूद

Guava

Psidium guajava · Myrtaceae (जम्बू कुल)

संस्कृत नाम: पेरुक, दृढ़बीज

फलदारनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल, पत्ते, छाल
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर
₹75छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

किस्में: अमरूद (इलाहाबाद सफ़ेदा) ₹75 · अमरूद (ललित) ₹75 · अमरूद (ताइवान पिंक) ₹75 · अमरूद (सरदार L-49) ₹75

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

अमरूद बिहार का सबसे आम और सस्ता पौष्टिक फल है। इसमें संतरे से कई गुना ज़्यादा विटामिन C और भरपूर रेशा (फाइबर) होता है। पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में यह नहीं है, पर लोक-चिकित्सा में इसके पत्ते बहुत काम आते हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. कोमल पत्ते चबाने या पत्तों के काढ़े से कुल्ला करने से मुँह के छाले और मसूड़ों की सूजन में आराम मिलता है।
  2. पत्तों का काढ़ा दस्त में लोक-परंपरा में दिया जाता है, क्योंकि यह कसैला है।
  3. पका फल कब्ज़ में फायदेमंद है; रेशा आँतों को साफ़ रखता है।
  4. भुना हुआ अमरूद खाँसी-ज़ुकाम में देहात में दिया जाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप, किसी भी मिट्टी में आसानी से फलता है। बरसात या फरवरी–मार्च में लगाएँ। इलाहाबादी सफ़ेदा, ललित और ताइवान पिंक जैसी किस्में गमले में भी फल देती हैं।

ध्यान दें

खाली पेट बहुत ज़्यादा अमरूद खाने से कुछ लोगों को गैस होती है।

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

इसी तरह के और पौधे