
अंजीर
Fig (Anjeer)
Ficus carica · Moraceae (वट कुल)
संस्कृत नाम: अञ्जीर, काकोदुम्बरिका (कुछ ग्रंथों में)
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
अंजीर एक छोटा, चौड़े पत्तों वाला फलदार पेड़ है, जिसके मुलायम, मीठे, अंदर से गुलाबी दानेदार फल होते हैं। सूखा अंजीर मेवों में गिना जाता है और रेशा, कैल्शियम व आयरन से भरपूर है। यूनानी और आयुर्वेद दोनों में यह कब्ज़ और कमज़ोरी की प्रसिद्ध औषधि है।
पारंपरिक उपयोग
- सूखे अंजीर को रात भर भिगोकर सुबह खाना पुरानी कब्ज़ में पारंपरिक घरेलू उपाय है।
- खून की कमी और कमज़ोरी में पौष्टिक आहार के रूप में खाया जाता है।
- दूध के साथ अंजीर बच्चों और बुज़ुर्गों को ताक़त के लिए दिया जाता है।
- कच्चे फल का दूधिया रस मस्से पर लगाने की लोक-परंपरा है (आँख से दूर रखें)।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, सूखी व अच्छी निकासी वाली मिट्टी। ज़्यादा पानी और जलभराव से बचाएँ। बड़े गमले में भी 1–2 साल में फल देता है। फरवरी–मार्च या बरसात के बाद लगाएँ।
ध्यान दें
पत्तों और कच्चे फल का दूध त्वचा में जलन कर सकता है।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





