
अनानास
Pineapple
Ananas comosus · Bromeliaceae
संस्कृत नाम: अनानास (आधुनिक नाम)
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
अनानास काँटेदार किनारों वाले लंबे पत्तों के गुच्छे के बीच उगने वाला फल है, जिसके ऊपर पत्तों का ताज होता है। यह दक्षिण अमेरिका से आया और अब असम, बंगाल, बिहार के किशनगंज-पूर्णिया में भी उगाया जाता है। इसमें 'ब्रोमेलेन' नाम का पाचक एंज़ाइम होता है।
पारंपरिक उपयोग
- भारी भोजन के बाद अनानास खाना पाचन में मदद करता है (ब्रोमेलेन के कारण)।
- विटामिन C और पानी से भरपूर होने से गर्मी में ताज़गी देता है।
- लोक-परंपरा में सूजन और गले की ख़राश में इसका रस दिया जाता है।
- पत्तों के रेशे से कपड़ा और रस्सी बनती है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
गर्म, नम जलवायु; धूप या हल्की छाँव, अच्छी निकासी वाली हल्की अम्लीय मिट्टी। फल का ऊपरी ताज या बगल के बच्चे लगाकर उगाया जाता है; गमले में भी लगता है। 18–24 महीने में फल।
ध्यान दें
कच्चा अनानास और ज़्यादा मात्रा मुँह में छाले और जलन करते हैं। गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में बहुत ज़्यादा न खाएँ।
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





