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आम – Mango

आम

Mango

Mangifera indica · Anacardiaceae (आम्र कुल)

संस्कृत नाम: आम्र, रसाल, सहकार

फलदारनर्सरी में उपलब्ध
उपयोगी भागफल (कच्चा व पका), गुठली, पत्ते, छाल, बौर
तासीरठंडी
धूपपूरी धूप
पानीमध्यम — ऊपर की मिट्टी सूखने पर

संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।

₹250छोटे पौधे का मूल्य · बड़े आकार का मूल्य अलग

किस्में: आम (लंगड़ा) ₹250 · आम (दुधिया मालदह) ₹250 · आम (आम्रपाली) ₹165 · आम (मल्लिका) ₹185 · आम (गुलाब खास) ₹250 · आम (चौसा) ₹250 · आम (बम्बइया) ₹250 · आम (दशहरी) ₹185 · आम (किशन भोग) ₹185

डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क

परिचय

आम को 'फलों का राजा' कहा जाता है और बिहार के मालदह, जर्दालु, लंगड़ा जैसे आम पूरे देश में मशहूर हैं। आयुर्वेद में पका आम पौष्टिक, बलवर्धक और वात-नाशक बताया गया है। इसके पत्ते हर शुभ काम में तोरण बनाकर लगाए जाते हैं।

पारंपरिक उपयोग

  1. गर्मी में लू से बचाव के लिए कच्चे आम का पना पिया जाता है।
  2. पका आम दुबलेपन और कमज़ोरी में पौष्टिक आहार है; आयुर्वेद इसे दूध के साथ लेने की सलाह देता है।
  3. गुठली (आम की गिरी) का चूर्ण दस्त और पेचिश में पारंपरिक रूप से दिया जाता है।
  4. कोमल पत्तों का काढ़ा और छाल लोक-चिकित्सा में मुँह के छालों और दस्त में उपयोग होते हैं।
  5. पत्ते और लकड़ी पूजा, हवन और विवाह के मंडप में शुभ माने जाते हैं।

आयुर्वेदिक गुण

गुण
पका फल — रस: मधुर (मीठा) · गुण: गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला) · तासीर: ठंडी; कच्चा फल — अम्ल (खट्टा), कषाय (कसैला), तासीर गर्म
दोषों पर असर
पका आम वात शांत करता है और बल बढ़ाता है; कच्चा आम ज़्यादा खाने पर पित्त बढ़ाता है।

कैसे लगाएँ और देखभाल

पूरी धूप और गहरी मिट्टी चाहिए। बरसात (जुलाई–अगस्त) में कलमी पौधा लगाएँ। आम्रपाली, मल्लिका जैसी बौनी किस्में बड़े गमले या छोटे आँगन में भी फल देती हैं।

ध्यान दें

कच्चा आम ज़्यादा खाने से गले में ख़राश, दस्त और फोड़े-फुंसी हो सकते हैं।

शब्दावली

वात
शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
पित्त
शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी

यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

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