
कमरख
Kamrakh (Star Fruit)
Averrhoa carambola · Oxalidaceae
संस्कृत नाम: कर्मरङ्ग
संक्षेप में: स्वाद में खट्टा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
कमरख का पीला-हरा फल काटने पर तारे जैसा दिखता है, इसलिए इसे 'स्टार फ्रूट' कहते हैं। बिहार-बंगाल में इसकी खट्टी चटनी और अचार बहुत पसंद किए जाते हैं। पेड़ छोटा, सजावटी और साल में दो-तीन बार फल देने वाला है।
पारंपरिक उपयोग
- फल भूख बढ़ाने और पाचन के लिए चटनी-अचार के रूप में खाया जाता है।
- विटामिन C का अच्छा स्रोत है।
- पके फल का रस गर्मी में प्यास बुझाने के लिए पिया जाता है।
- लोक-परंपरा में पत्तों का लेप खुजली और दाद पर लगाया जाता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- अम्ल (खट्टा)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- वात को शांत करता है, पित्त बढ़ा सकता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
धूप या हल्की छाँव, नम पर अच्छी निकासी वाली मिट्टी। बरसात में लगाएँ। बड़े गमले में भी फल देता है।
ध्यान दें
किडनी (गुर्दे) के मरीज़ कमरख बिल्कुल न खाएँ — इसमें ऐसा तत्व है जो उनके लिए ख़तरनाक हो सकता है। ज़्यादा ऑक्सालेट के कारण पथरी वाले भी बचें।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





