
जामुन
Jamun
Syzygium cumini · Myrtaceae (जम्बू कुल)
संस्कृत नाम: जम्बू, महाफला, राजजम्बू
संक्षेप में: स्वाद में कसैला, मीठा, खट्टा, तासीर ठंडी। जलन, एसिडिटी और गर्मी; बलगम, सर्दी-खाँसी और भारीपन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
किस्में: जामुन ₹100 · जामुन (हाइब्रिड) ₹100
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
जामुन ऊँचा, घना, सदाबहार पेड़ है, जिसके बैंगनी-काले, खट्टे-मीठे-कसैले फल बरसात की शुरुआत में पकते हैं। भारत का प्राचीन नाम 'जम्बूद्वीप' इसी पेड़ से जुड़ा माना जाता है। आयुर्वेद में इसकी गुठली शुगर संतुलन के लिए प्रसिद्ध है।
पारंपरिक उपयोग
- जामुन की गुठली का चूर्ण शुगर संतुलित रखने के लिए पारंपरिक रूप से लिया जाता है (डॉक्टर की दवा के साथ, उसकी जगह नहीं)।
- कसैला होने से फल और छाल दस्त और पेचिश में उपयोगी माने गए हैं।
- पत्ते और छाल का काढ़ा मुँह के छालों और मसूड़ों के लिए कुल्ले में।
- फल का सिरका पाचन और भूख के लिए उपयोग होता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- कषाय (कसैला), मधुर (मीठा), अम्ल (खट्टा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), रूक्ष (रूखा, नमी सुखाने वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- कफ और पित्त को शांत करता है, वात बढ़ा सकता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, गहरी मिट्टी, नम ज़मीन भी सह लेता है। बरसात में लगाएँ। कलमी पौधा 4–5 साल में फल देता है; बीजू पेड़ 8–10 साल में।
ध्यान दें
खाली पेट या दूध के तुरंत बाद ज़्यादा जामुन न खाएँ। शुगर की दवा के साथ शुगर की जाँच करते रहें।
शब्दावली
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





