
केला
Banana
Musa paradisiaca · Musaceae (कदली कुल)
संस्कृत नाम: कदली, रम्भा, मोचा
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, कसैला, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
किस्में: केला (मालभोग) ₹50 · केला (G-9) ₹50
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
केला सबसे आसानी से मिलने वाला, ऊर्जा से भरपूर फल है। बिहार का हाजीपुर का मालभोग और चिनिया केला बहुत मशहूर है। केले का हर भाग काम आता है — फल, फूल (मोचा), तने का बीच का भाग और पत्ते, जिन पर भोजन परोसना शुभ माना जाता है।
पारंपरिक उपयोग
- पका केला कमज़ोरी, खिलाड़ियों की थकान और पोटैशियम की कमी में तुरंत ऊर्जा देता है।
- कच्चे केले की सब्ज़ी और उबला केला दस्त में पारंपरिक आहार है।
- केले के तने का रस लोक-परंपरा में पेशाब की जलन और पथरी में दिया जाता है।
- मोचा (केले का फूल) की सब्ज़ी आयरन से भरपूर मानी जाती है।
- पत्ते छठ, सत्यनारायण पूजा और भोजन परोसने में काम आते हैं।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा), कषाय (कसैला)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है, कफ बढ़ाता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, भरपूर पानी और खाद चाहिए; जलभराव नहीं। फरवरी–मार्च या जून–अगस्त में पौधा लगाएँ; 11–14 महीने में घौद (गुच्छा) तैयार होता है।
ध्यान दें
किडनी के मरीज़ पोटैशियम के कारण डॉक्टर से पूछकर ही ज़्यादा केला खाएँ।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





