
नारियल
Coconut
Cocos nucifera · Arecaceae (ताल कुल)
संस्कृत नाम: नारिकेल, लाङ्गली
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर ठंडी। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन; जलन, एसिडिटी और गर्मी जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
नारियल को 'कल्पवृक्ष' कहा जाता है, क्योंकि इसका हर भाग काम आता है। पूजा में नारियल (श्रीफल) चढ़ाए बिना कोई शुभ काम पूरा नहीं माना जाता। आयुर्वेद में कच्चे नारियल का पानी सबसे अच्छा प्राकृतिक ठंडा और पौष्टिक पेय बताया गया है।
पारंपरिक उपयोग
- नारियल पानी गर्मी, लू, दस्त और उल्टी के बाद शरीर में पानी और नमक की कमी पूरी करता है।
- नारियल तेल बालों, रूखी त्वचा, फटी एड़ियों और बच्चों की मालिश में लगाया जाता है।
- गिरी पौष्टिक है; पेट की जलन और एसिडिटी में कच्ची गिरी खाई जाती है।
- जटा से रस्सी, पायदान और गमलों की कोकोपीट बनती है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
- तासीर
- ठंडी
- दोषों पर असर
- वात और पित्त को शांत करता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, भरपूर पानी, रेतीली-दोमट मिट्टी। बरसात में लगाएँ। बौनी (ड्वार्फ) किस्म बिहार में 4–5 साल में फल देती है; पाले से छोटे पौधे बचाएँ।
ध्यान दें
किडनी के मरीज़ पोटैशियम के कारण नारियल पानी डॉक्टर से पूछकर ही लें।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





