
अखरोट
Walnut
Juglans regia · Juglandaceae
संस्कृत नाम: अक्षोट, फलस्नेह
संक्षेप में: स्वाद में मीठा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
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परिचय
अखरोट ठंडे पहाड़ों (कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) का बड़ा पेड़ है, जिसके हरे फल के अंदर सख़्त खोल में दिमाग़ जैसी दिखने वाली गिरी होती है। यह ओमेगा-3 वसा, प्रोटीन और खनिजों से भरपूर मेवा है। आयुर्वेद में इसे बलवर्धक और वात-नाशक बताया गया है।
पारंपरिक उपयोग
- रोज़ 2–3 अखरोट खाना दिमाग़ और दिल के लिए अच्छे वसा का स्रोत माना जाता है।
- सर्दियों में कमज़ोरी और दुबलेपन में पौष्टिक मेवे के रूप में।
- छाल (दंदासा) से दाँत साफ़ करने और होंठ रँगने की पुरानी परंपरा है।
- हरे छिलके से प्राकृतिक भूरा रंग बनता है।
आयुर्वेदिक गुण
- रस (स्वाद)
- मधुर (मीठा)
- गुण (प्रकृति)
- गुरु (भारी, देर से पचने वाला), स्निग्ध (चिकनाई वाला)
- तासीर
- गर्म
- दोषों पर असर
- वात को शांत करता है; कफ-पित्त बढ़ा सकता है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
ठंडी सर्दी चाहिए — बिहार के मैदान में अखरोट पर फल नहीं आते। पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त पेड़।
ध्यान दें
मेवे से एलर्जी वाले सावधान रहें। ज़्यादा खाने से गर्मी और दस्त हो सकते हैं।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





