
इमली
Tamarind
Tamarindus indica · Fabaceae (शिम्बी कुल)
संस्कृत नाम: अम्लिका, चिञ्चा
संक्षेप में: स्वाद में खट्टा, तासीर गर्म। गैस, जोड़ों का दर्द और रूखापन जैसी तकलीफ़ों में सहायक मानी जाती है।
डिलीवरी ₹100 से (200 कि.मी. तक) · नर्सरी से लेने पर निःशुल्क
परिचय
इमली 20–25 मीटर ऊँचा, सैकड़ों साल जीने वाला घना छायादार पेड़ है। इसकी भूरी फलियों का खट्टा-मीठा गूदा चटनी, साँभर और गोलगप्पे के पानी की जान है। पकी इमली आयुर्वेद में भूख बढ़ाने वाली और हल्की दस्तावर मानी गई है।
पारंपरिक उपयोग
- पकी इमली का पना गर्मी और लू में शरीर को ठंडक और ताज़गी देने के लिए पिया जाता है।
- गूदा भूख बढ़ाने और कब्ज़ में हल्के जुलाब की तरह पारंपरिक रूप से लिया जाता है।
- पत्तों का काढ़ा सूजन और मोच पर सेंक के रूप में लगाया जाता है।
- बीजों का चूर्ण लोक-परंपरा में जोड़ों के दर्द में उपयोग होता है।
- पीतल-ताँबे के बर्तन चमकाने में भी इमली का प्रयोग होता है।
आयुर्वेदिक गुण
- गुण
- रस: अम्ल (खट्टा) · गुण: गुरु (भारी, देर से पचने वाला) · तासीर: गर्म (कच्ची); पकी इमली मधुर (मीठा)-अम्ल (खट्टा)
- दोषों पर असर
- वात को शांत करती है; कच्ची इमली ज़्यादा खाने पर कफ-पित्त बढ़ाती है।
कैसे लगाएँ और देखभाल
पूरी धूप, सूखा सहन करती है, किसी भी मिट्टी में उग जाती है। बरसात में लगाएँ। बीज वाला पेड़ 8–10 साल में और कलमी 4–5 साल में फल देता है।
ध्यान दें
दाँतों के इनेमल, एसिडिटी और जोड़ों की सूजन में ज़्यादा कच्ची इमली न खाएँ।
शब्दावली
- वात
- शरीर की हवा/गति वाली शक्ति; बिगड़ने पर गैस, जोड़ों का दर्द, रूखापन, कब्ज़ और बेचैनी
- कफ
- शरीर की नमी और बलगम वाली शक्ति; बिगड़ने पर सर्दी-खाँसी, बलगम, भारीपन और सुस्ती
- पित्त
- शरीर की गर्मी और पाचन वाली शक्ति; बिगड़ने पर जलन, एसिडिटी, ज़्यादा गर्मी और फोड़े-फुंसी
यह जानकारी पारंपरिक आयुर्वेद और लोक-ज्ञान पर आधारित है और केवल जानकारी के लिए है, इलाज के लिए नहीं। किसी भी बीमारी में डॉक्टर या पंजीकृत आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही दवा लें, और चल रही दवा अपने आप बंद न करें। गर्भावस्था, छोटे बच्चों और पहले से दवा ले रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।





